वीर संवत 2550, पौष सूद 9 से पौष वद 1, शुक्रवार, 19 जनवरी से शुक्रवार, 26 जनवरी, 2024

अध्यात्मतीर्थ है सुवर्णपुरी, जहां बरसे ज्ञान धनेरा...

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अद्भुत पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव

अद्भुत पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव

आदर्श पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के साथ-साथ इस प्रसंग को निम्न कारणों से एक अद्भुत पंचकल्याणक के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।

  • प्रथम तो 41 फीट उन्नत बाहुबली मुनीन्द्र की प्रतिमा और उसके साथ सुन्दर जम्बूद्वीप की रचना के साथ प्रवचनमण्डप में विराजमान 3 भगवान और श्री सीमंधरस्वामी जिनमन्दिर में 4 बालयति भगवान सुवर्णपुरी की शोभा में विशिष्ट अभिवृद्धि कर रहे थे।
  • एक अद्भुत ‘श्री जम्बूद्वीप-बाहुबली जिनायतन प्रोजेक्ट चोरस फीट (स्क्वायर फीट) योजना’ भी ट्रस्ट द्वारा घोषित की गयी थी। इस योजना का अभिप्राय यह था कि सर्व साधर्मी संकुल के निर्माण में भाग ले सकें। इस योजना को बहुत अच्छा प्रतिसाद प्राप्त हुआ था। जिसके अन्तर्गत भाग लेनेवाले लाभार्थियों में से मैजिक व्हिल (Magic Wheel) द्वारा निर्धारित 10 परिवारों को 2 जिनप्रतिमाओं की प्रतिष्ठा करने का लाभ भी प्रदान किया गया था।
  • जिस स्थान पर यह पंचकल्याणक मनाया गया, वह स्थान अर्थात् जो अयोध्यानगरी बनायी गयी थी, वह सभी के मन को हर लेनेवाली थी। पाण्डाल के बाहर आशीर्वाद प्रदान करती अति विशाल पूज्य गुरुदेवश्री की प्रतिकृति अद्भुत रीति से शोभित हो रही थी।
  • इतिहास में सर्वप्रथम बार 3D Animation द्वारा यागमण्डल विधान करते समय प्रत्येक मुमुक्षु स्वाध्याय के रंग में रंग गये थे। जिसमें एक-एक गाथा का भाव समझ में आ जाये, ऐसा प्रयोग 3D दृश्यों द्वारा किया गया था।
  • आधुनिक टैक्नोलॉजी द्वारा प्रत्येक प्रसंग को दृश्य और क्रोमाशूट के माध्यम से दर्शाकर मानो कि हम साक्षात् उस युग में पहुँच गये हों, ऐसा अनुभव हो रहा था।
  • माता के सोलह स्वप्न, उनका फल दर्शाता हुआ नृत्य, इन्द्रसभा, राज्यसभा की तत्त्वचर्चायें, बाल तीर्थंकर का जन्माभिषेक, पालनाझूलन का उत्साह, तपकल्याणक में वैराग्य के समस्त प्रसंग, आहारदान, समवसरण रचना और अन्तिम मोक्षकल्याणक का दृश्य समस्त प्रसंग अविस्मरणीयरूप से सम्पन्न हुए।
  • સ્स्वाध्यायप्रेमी देव-देवी के रूप में 31 जोड़े बनाये गये थे। जो इन्द्र-इन्द्राणी के साथ स्वर्ग से पंचकल्याणक मनाने आते हैं और तीर्थंकर भगवान के कल्याणकों की पूजा तथा प्रतिष्ठा के विधानों में लाभ लेते हैं। इस योजना द्वारा स्वाध्याय को अद्भुत प्रोत्साहन प्रदान किया गया था।
  • संध्याकाल की बेला के सांस्कृतिक कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केन्द्र बने रहे—‘सर्वगुणांश ते समकित’, ‘मैं सोनगढ़’, ‘अकृत्रिम चैत्यालयस्य वंदनम’, ‘आदिपुराण’, ‘ततक्षण योग्यता’ आदि कार्यक्रमों ने तो धूम मचाकर तत्त्वज्ञान की रेलमछेल कर दी थी।
  • भरत-बाहुबली और ब्राह्मी-सुन्दरी का संवाद हुआ जिसमें महाराज ऋषभदेव की वैराग्यमय परिणति दर्शाकर मुमुक्षु जीवों को भाव विभोर कर दिया।
  • इस प्रसंग की विशिष्टता यह थी कि अनेक दिगम्बर के अतिरिक्त जैन तथा अनेक जैनेतर जिज्ञासु भी पधारे थे। और महोत्सव का लाभ लेकर, सत्य तत्त्व सुनकर धन्य बन गये थे।