वीर संवत 2550, पौष सूद 9 से पौष वद 1, शुक्रवार, 19 जनवरी से शुक्रवार, 26 जनवरी, 2024
अध्यात्मतीर्थ है सुवर्णपुरी, जहां बरसे ज्ञान धनेरा...
वीर संवत 2550, पौष सूद 9 से पौष वद 1, शुक्रवार, 19 जनवरी से शुक्रवार, 26 जनवरी, 2024
अध्यात्मतीर्थ है सुवर्णपुरी, जहां बरसे ज्ञान धनेरा...
आत्मार्थी ब्रह्मचारी बहिनों ने पूज्य गुरुदेवश्री और पूज्य भगवती माता की छत्रछाया में भूतकाल में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में दीक्षाकल्याणक के मंगल दिन देव-शास्त्र-गुरु, ज्ञानी धर्मात्मा तथा आदरणीय प्रतिष्ठाचार्य की साक्षी में आजीवन आत्मसाधना के लिये निवृत्ति ली थी। ट्रस्ट ने उन आदरणीय ब्रह्मचारी बहिनों के प्रति आदरभाव को शिरोधार्य रखकर उनका यथायोग्य सम्मान और गरिमा रहे, इस प्रकार से प्रतिष्ठा महोत्सव में व्यवस्था की थी। प्रतिष्ठा महोत्सव में ब्रह्मचारी बहिनों के लिये सानुकूल अलग बैठक की व्यवस्था और शुद्ध भोजन की भी सुन्दर व्यवस्था सावधानीपूर्वक की गयी थी। प्रत्येक प्रसंग में मंगल विधि, भक्ति-पूजन-विधान, वेदीशुद्धि, घटपूरणविधि आदि यथायोग्य प्रतिष्ठा की विधियों में ब्रह्मचारी बहिनों को प्रथम लाभ प्रदान किया गया था। आदरणीय बहिनों ने भी इन विधियों में विशिष्ट उत्साहपूर्वक लाभ लिया था। उन्होंने प्रतिष्ठा महोत्सव मनाकर ट्रस्टियों का आभार व्यक्त करते हुए उत्कृष्ट प्रतिभाव प्रदान करते हुए सानन्द अवगत कराया कि यह प्रतिष्ठा महोत्सव भव्यातिभव्य हुआ और मानो कि देवों ने ही भरतक्षेत्र में आकर मनाया हो, ऐसी अभूतपूर्व अनुभूति हुई। पूज्य गुरुदेवश्री तथा पूज्य माताजी के मंगल आशीष देवलोक में से बरस रहे थे, ऐसा अनुभूत होता था।