वीर संवत 2550, पौष सूद 9 से पौष वद 1, शुक्रवार, 19 जनवरी से शुक्रवार, 26 जनवरी, 2024

अध्यात्मतीर्थ है सुवर्णपुरी, जहां बरसे ज्ञान धनेरा...

अयोध्यापुरी की रचना

अयोध्यापुरी की रचना

प्रतिष्ठा मण्डप की व्यवस्था

सुवर्णपुरी में होनेवाले पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में आठ दिन का कार्यक्रम था और कुल पाँच अलग-अलग संकुलों में कार्यक्रम होनेवाला था। पाण्डाल समिति का उद्देश्य था कि 18000 से 20000 साधर्मियों को सभी कार्यक्रमों में यथोचित लाभ प्राप्त हो और सभी को एक अनोखा अनुभव मिले और किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। इस उद्देश्य के साथ सफलतापूर्वक प्रतिष्ठा महोत्सव के सवेरे 6.30 से रात्रि के 10.00 बजे तक के कार्यक्रम निर्विघ्नरूप से पूर्ण हों, यह भी इस टीम का उत्तरदायित्व था।

225 सदस्यों की इस टीम ने उत्तरदायित्वों को सुचारूप से पूर्ण किया। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के आठों दिनों के कार्यक्रम तथा प्रासंगिक कार्यक्रम, जैसे कि नवीन जिनमन्दिर की वेदीशुद्धि (1008 कलशों द्वारा), सुमेरु पर्वत पर बाल तीर्थंकर का जन्माभिषेक (4500 मुमुक्षुओं को लाभ), बाल तीर्थंकर का पालनाझूलन (15000 मुमुक्षुओं द्वारा), दीक्षाकल्याणक, श्री ऋषभ मुनिराज को आहारदान (3500 मुमुक्षुओं को लाभ), समवसरण रचना, 2000 साधर्मियों द्वारा 140 भगवन्तों की प्रतिष्ठा तथा लगभग 5000 मुमुक्षुओं द्वारा जिनेन्द्र भगवन्तों के महामस्तकाभिषेक के कार्यक्रम विधि-विधानपूर्वक निर्विघ्नरूप से सम्पन्न हुए। प्रौढ़, वयोवृद्धजनों ने भी इन सभी कार्यक्रमों में पूर्ण निराकुलता से लाभ लिया। तदुपरान्त तात्कालिक कार्यक्रमरूप से धार्मिक, व्यावसायिक, सामाजिक और राजकीय महानुभावों की व्यवस्था के आयोजन का कार्य अल्प समय में ही इस टीम ने सफलतापूर्वक किया था। इस प्रकार सुरक्षा, स्वच्छता, सचोटता और हर्षोल्लासपूर्वक यह प्रतिष्ठा महोत्सव का कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ।