वीर संवत 2550, पौष सूद 9 से पौष वद 1, शुक्रवार, 19 जनवरी से शुक्रवार, 26 जनवरी, 2024

अध्यात्मतीर्थ है सुवर्णपुरी, जहां बरसे ज्ञान धनेरा...

इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) और डिजिटल सेवायें

इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) और डिजिटल सेवायें

वर्तमान के डिजिटल युग में IT और डिजिटल सेवायें अनिवार्य हुई हैं। इस तथ्य को ध्यान में रखकर प्रतिष्ठा समिति द्वारा IT और डिजिटल सेवा टीम का कार्य प्रारम्भ से ही किया गया। इस टीम का कार्य निम्नानुसार वर्गीकरण किया गया :

  • पंजीकरण प्रक्रिया (Registration) के लिए ऐप और वेबसाईट का निर्माण और व्यवस्था।
  • सोश्यल मीडिया का आयोजन [YouTube (12.6 Lakh Views till the end of Pratishtha), Facebook, Instragram & WhatsAPP].
  • मुमुक्षुओं की समस्त जानकारियाँ और सूचनायें सरलता से प्राप्त हों, तदर्थ WhatsApp चेटबोट (35000 लाभार्थी)।
  • मुख्य पाण्डाल और अन्य स्थलों से हार्डवेयर और नेटवर्किंग सेटअप।

इस टीम का कार्य सर्वप्रथम सोश्यल मीडिया, वेबसाईट तथा ऐप डेवलपमेन्ट द्वारा शुरु हुआ। उनके समक्ष सम्पूर्ण भारतवर्ष तथा विश्व के समस्त मुमुक्षुओं को प्रतिष्ठा महोत्सव के संदेश पहुँचाने का और उनका प्रतिष्ठा के लिये रजिस्ट्रेशन करने का ध्येय था। इन माध्यमों द्वारा मुमुक्षुओं को प्रतीकचिह्न के विमोचन से लेकर प्रतिष्ठा के अन्तिम दिन तक के कार्यक्रम की तथा अब प्रतिष्ठा के स्मरणरूप उत्साहवर्धक वीडियो पहुंचाने का कार्य सुचारूरूप से संचालित हो रहा है।

प्रत्येक मण्डल में अपने युवा कार्यकर्ताओं ने विगत दो महीनों से वेबसाईट और ऐप के माध्यम से रजिस्ट्रेशन करने के लिये सक्रिय भाग लिया था और इसलिए इन माध्यमों से लगभग 18000 रजिस्ट्रेशन हुए। उसके परिणामस्वरूप अन्य व्यवस्था (आवास, यातायात, पाण्डाल, भोजन इत्यादि) करनेवाली टीमों का कार्य सुलभ हुआ। डिजिटल पेमेन्ट की सुविधा से कमेटियों का (एकाउन्ट्स) तथा मुमुक्षुओं का कार्य सुलभ हुआ और उन्हें कोई असुविधा नहीं हुई।

हार्डवेयर और नेटवर्किंग सेटअप एक अत्यन्त ही महत्वपूर्ण हिस्सा था। समग्र प्रतिष्ठा मण्डप तथा अन्य स्थानों, जैसे कि स्वाध्यायमन्दिर परिसर, श्री बाहुबली-जम्बूद्वीप संकुल, जन्माभिषेक मैदान, चीकू वाडी इत्यादि इन्टरनेट कनेक्टिविटी से जोड़े गये थे। जिससे प्रतिष्ठा मण्डप तथा YouTube द्वारा विश्व में जीवन्त प्रसार (Live Broadcasting) सरल बना।

प्रतिष्ठा के दौरान दोनों सिंहद्वार पर रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की थी। जिसके फलस्वरूप मुमुक्षु अपने डिजिटल आईडी के आधार से हेन्डबेन्ड प्राप्त करके प्रतिष्ठा का निर्विघ्नरूप से लाभ लेते थे। इस प्रकार प्रतिष्ठा के समय 60 सदस्यों की सुवर्णपुरी समर्पित एक टीम तैयार हुई थी।