वीर संवत 2550, पौष सूद 9 से पौष वद 1, शुक्रवार, 19 जनवरी से शुक्रवार, 26 जनवरी, 2024
अध्यात्मतीर्थ है सुवर्णपुरी, जहां बरसे ज्ञान धनेरा...
वीर संवत 2550, पौष सूद 9 से पौष वद 1, शुक्रवार, 19 जनवरी से शुक्रवार, 26 जनवरी, 2024
अध्यात्मतीर्थ है सुवर्णपुरी, जहां बरसे ज्ञान धनेरा...
मुख्य मण्डप के पास में 15 एकड़ की एक दूसरी जगह में बसों और गाडिय़ों का पार्किंग रखा गया था। पालीताणा, सिहोर, भावनगर आदि अनेक स्थानों, जहाँ मुमुक्षुओं को आवास प्रदान किया गया था, वहाँ से निरन्तर 150 बसें मुख्य मण्डप तक यातायात के लिये रखी गयीं थीं। तदुपरान्त 500 से 550 गाडिय़ों की पार्किंग के लिये व्यवस्था की गयी थी। सात दिन तक अच्छी से अच्छी सुविधा प्रदान की गयी थी। शारीरिक समस्यावालों के लिये गोल्फकार और सोनगढ़ में पण्डाल तक पहुँचने के लिये रिक्शा की व्यवस्था की गयी थी।
कार्यक्रम में भाग लेनेवाले वीआईपीयों के लिये एक भव्य विश्रामखण्ड (लाउन्ज) बनाया गया था। तदुपरान्त लगभग 2000 मुमुक्षु आराम कर सकें, ऐसे तीन विशाल पाण्डाल बनाये गये थे। आपत्ति प्रबन्धन के लिये एक विशेष टीम सदा तत्पर रखी गयी थी। सभी मण्डपों में अग्निशामक स्प्रे रखा गया था। सम्पूर्ण संकुल में एक भी खुला वायर नहीं था, उनकी योग्य सुरक्षा की गयी थी। तीन अग्निशामक वाहन और निरन्तर अग्निशामक कर्मचारी सुरक्षा हेतु रखे गये थे। स्वास्थ्य समिति की टीम में विविध शाखाओं के कुल 23 मुमुक्षु डॉक्टरों ने सेवा प्रदान की थी। इसके अतिरिक्त 2 RMO डॉक्टर, 7 नर्सिंग स्टाफ, 3 वार्डबॉय और 3 ऐम्बुलेंस भी तैयार रखी गयी थीं। (विशेष वर्णन निम्न विभाग में)। आवास और रजिस्ट्रेशन आदि के लिये आधुनिक तकनीक का उपयोग आदि बहुत प्रशंसनीय कार्य स्वाध्यायमंदिर के ट्रस्टियों और प्रतिष्ठा कमेटी द्वारा किया गया था।
प्रत्येक मुमुक्षु की सुरक्षा के लिये मेटल डिटेक्टर्स की व्यास्था की गयी थी। 400 से अधिक सुरक्षाकर्मी तथा सोनगढ़ पुलिस के अधिकारी निरन्तर सुरक्षा व्यवस्था हेतु नियुक्त थे। 24 घण्टे लाईट की व्यवस्था के लिये 30 बड़े जनरेटर तैयार रखे गये थे। किसी भी कार्य के लिये किसी भी प्रकार का समझौता किये बिना श्रेष्ठतम प्रोफेशनल एजेन्सियों से कार्य करवाया गया था।