वीर संवत 2550, पौष सूद 9 से पौष वद 1, शुक्रवार, 19 जनवरी से शुक्रवार, 26 जनवरी, 2024
अध्यात्मतीर्थ है सुवर्णपुरी, जहां बरसे ज्ञान धनेरा...
वीर संवत 2550, पौष सूद 9 से पौष वद 1, शुक्रवार, 19 जनवरी से शुक्रवार, 26 जनवरी, 2024
अध्यात्मतीर्थ है सुवर्णपुरी, जहां बरसे ज्ञान धनेरा...
पंचकल्याणक प्रतिष्ठा उत्सव जैनियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण आयोजनों में से एक है। यह आयोजन हजारों अनुयायियों द्वारा 6 से 8 दिनों तक बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस त्यौहार के दौरान पत्थर की मूर्तियाँ (जो शुरू में सिर्फ पत्थर या धातु की आकृतियाँ होती हैं) प्रतिष्ठा नामक एक पवित्र समारोह से गुजरती हैं। इस समारोह में, उन्हें जिनेंद्र देव में बदल दिया जाता है और एक सच्चे भगवान के रूप में माना जाता है। प्रक्षाल, पूजन, अर्चनादि दैनिक अनुष्ठान भक्ति एवं पवित्रता से पूर्ण किये जाते हैं।
अधिक जानेइस प्रसंग को हम समग्र मुमुक्षु समाज के लिये एक आदर्श पंचकल्याणक के रूप में प्रस्तुत कर सके हैं, इसके अनेक कारण भी हैं। उसमें से अमुक यहाँ प्रस्तुत हैं।
अधिक जानेआदर्श पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के साथ-साथ इस प्रसंग को निम्न कारणों से एक अद्भुत पंचकल्याणक के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।.
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